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मुझ को अंदर से पुकारे कोई | Hindi Shayari | S𝚊𝚍 D𝚒𝚊𝚕𝚘𝚐𝚞𝚎

ग़ज़ल बह्र: 2122 1122 22 फिर ज़ख़्म दिल के उभारे कोई मुझ को  अंदर  से  पुकारे  कोई /1 ढूँढना  मुझ को  है गर, तो ढूँढो  उसकी आँखों के  किनारे कोई /2 उसकी आँखों की है  पी ली मैंने ये   नशा   तो   ना   उतारे  कोई /3 एक   अर्से  से  पड़ा   है  आख़िर आंखों   में   मुँह    पसारे    कोई /4 जैसे   चाहा    उसे    मैंने    यारों चाहता   ऐसे   ना    प्यारे    कोई /5 चंद  दिनों का  हूँ  मेहमां  शायद रात  दिन  मुझ को  निहारे  कोई /6 अब तो "आकाश" चलो चलते हैं कर  रहा  कब  से  इशारे   कोई /7  20/01/2021 5:28 PM
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